POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 1 [story_title] => Part 1 | Hunted STory [story_content] =>
ये कहानी तीन दोस्तों की है। जिनका नाम विक्रम, सुनील और जॉन होता है। जो बम्बई शहर में नौकरी करने के लिए आते हैं। तीनों बचपन के दोस्त, कुछ कर दिखाने का सपना लिए, इस भीड़ भाड़ वाली जगह में अपना मुक़ाम पाने के लिए दर दर भटकते हैं। उन्हें कोई भी रास्ता नज़र नहीं आता।अपने छोटे से गाँव में रह कर, कॉलेज की पढ़ाई करने वाले सुनील और बिक्रम ने कभी सोचा भी नहीं था, कि सफलता पाने के लिए इतना दर्द झेलना पड़ता है। वहीं, जॉन अपने पापा के बिज़नेस में पहले से ही संघर्ष कर चुका था। जिस वजह से उसे इन सब चीज़ों की आदत सी हो गई थी। जॉन अच्छे से जानता था, कि सफलता इतनी आसानी से नहीं मिलेगी, क्योंकि उसने अपने पापा को दिन रात मेहनत करते हुए देखा था। तभी तीनों को सुबह से भटकते भटकते शाम हो जाती है़। लेकिन न कोई नौकरी और न ही कोई रहने का ठिकाना उनके हाथ लगता। तीनों मायूस होकर 1 छोटे से होटल में खाना खाते हैं। दरअसल उनके पास कोई ख़ास पैसे भी नहीं होते। वह तो सिर्फ़ अपनी एक दो दिन की व्यवस्था बनाकर निकले थे, उन्हें लगा था, कि आते ही उनके साथ कोई चमत्कार होगा, और उनको नौकरी मिल जाएगी। तीनों एक बिल्डिंग के पास पहुँच जाते हैं|
कुछ देर बाद सभी बिल्डिंग के गेट के पास बैठ जाते हैं। एक दो घंटा बैठे हुए गुज़र जाते हैं। तभी बिल्डिंग के चौकीदार की नज़र उन पर पड़ती है और वह ज़ोर की आवाज़ में उन्हें डांटते हुए कहता है, कौन हो तुम लोग, यहाँ क्यों बैठे हो ? तीनों अजनबी शहर में किसी को पहचानते नहीं, और न ही उनका कोई ठिकाना है। तीनों अपनी जगह पर जल्दी खड़े हो जाते हैं, और अपनी बात चौकीदार को बताते हैं। चौकीदार को तीनों की हालत देखकर उन पर तरस आता है। उसे एहसास होता है कि कुछ सालों पहले ऐसे ही वह काम माँगने आया था। तब किसी ने उसे सहारा दिया था, और आज कम से कम वह इतने बड़े शहर में छोटे से काम के साथ जीवन यापन कर पा रहा है। जॉन उन तीनों में थोड़ा समझदार होता है। वह चौकीदार से कहीं रहने के जुगाड़ की बात कहता है क्योंकि उसे पता है, कि अभी उनकी हालत किराया देने की नहीं है, तो उन्हें कोई किराया से कमरा क्यों देगा। तभी चौकीदार अपने एक दोस्त से फोन पर बात करता है, जो वही से कुछ ही दूर बंगला नंबर 17 में साफ़ सफ़ाई का काम करता है। चौकीदार अपने दोस्त को सारी बात बताता है। तभी उसका दोस्त कहता है कि मेरे साहब तो, अपने परिवार के साथ दो महीनों के लिए बाहर गए हैं। तब तक मैं रहने का इंतज़ाम कर सकता हूँ। यह बात सुनकर तीनों दोस्त बहुत ख़ुश हो जाते हैं, और वह जल्दी से चौकीदार से कहते हैं, कि आप हमें बता दीजिए हम उनके पास कैसे पहुँच सकते हैं ? चौकीदार कहता है, कि वह बंगला थोड़ा दूर है। रात को वहाँ कोई टैक्सी ऑटो भी नहीं मिलेगा। आज तुम लोग यही सो जाओ। कल सुबह हम साथ चलेंगे। तीनों उसकी बात मान जाते हैं। सुबह उठते ही तीनों चौकीदार के साथ बंगले में पहुँच जाते हैं। बंगले की ख़ूबसूरती देखकर तीनों दोस्त हक्का बक्का रह जाते हैं। उन्हें यक़ीन ही नहीं होता, कि उन्हें इतने अच्छे बंगले में रहने का मौक़ा मिलेगा। बंगले का नौकर तीनों दोस्तों को गेस्ट रूम में ले जाता है। तीनों दोस्त रूम में पहुंचकर राहत की साँस लेते हैं। जल्दी से तीनों नहा कर तैयार हो जाते हैं, और काम की तलाश में निकल जाते हैं।
[story_id] => 13 ) POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 1 [story_title] => Part 2 | Hunted Story [story_content] =>अब रहने का तो ठिकाना लग चुका था। तलाश थी केवल अच्छे काम की। जिससे उनका गुज़ारा चल सके, लेकिन आज भी उनके साथ वही होता है। सुबह से शाम हो जाती है, लेकिन तीनों हताश होकर वापस अपने स्थान आ जाते हैं। नौकर तीनों के लिए खाने का इंतज़ाम करके रखता है। जिससे उन्हें बहुत ही राहत मिलती है। आज तीनों दोस्तों के लिए बंगले की पहली रात होती है। रात को 12 बजते ही अचानक बिक्रम की नींद खुल जाती है, और वह अपने आपको बंगले के तहख़ाने में पाता है। जहाँ पुराना सामान इकट्ठा करके रखा हुआ था। उसे समझ में नहीं आता, कि वह यहाँ कैसे पहुँचा तभी वह घबराहट में अपने दोस्तों को आवाज़ लगाता है, लेकिन किसी को कुछ सुनाई नहीं देता। तभी उसके कानों में सब कुछ सुनाई देना बंद हो जाता है, और सिर्फ़ एक औरत के रोने की आवाज़ जाती है। विक्रम चिल्लाकर पूछता है। कहाँ हो, तुम क्यों रो रही हो ? अगले ही पल बिक्रम अपने बिस्तर में होता है। वह डर के कारण पसीने से लथपथ हो जाता है, वह अपने दोस्तों को जगाता है। सुनील और जॉन दोनों उसकी बात का मज़ाक उड़ाते हैं, और कहते हैं तुमने कोई सपना देखा होगा। इस बंगले में तो हमारे अलावा कोई भी नहीं है, और विक्रम भी, अपने दोस्तों की बात का यक़ीन करके, इस घटना को बुरा सपना समझ कर नज़रअंदाज़ करके सो जाता है। सुबह उठते ही तीनों दोस्त फिर से तैयार होकर काम ढूंढने निकल पड़ते हैं, लेकिन जैसे ही वह बंगले के गेट से बाहर निकलते हैं। अचानक कोई औरत आकर बिक्रम को चिट्ठी देती है। जिसमें लिखा होता है, तुम इस पते पर जाओ तो, काम मिल जाएगा, और औरत अचानक भागते हुए उनकी नज़रों से ओझल हो जाती है। तीनों दोस्त की सोच में पड़ जाते हैं कि हमें काम की ज़रूरत है। यह इस औरत को कैसे पता। लेकिन तीनों को काम की बहुत ज़रूरत होती है। उन्हें लगता है कि भगवान ने उनकी मदद करने के लिए किसी को भेजा होगा, और तीनों उसी दिशा में आगे निकल जाते हैं। जहाँ का पता उस काग़ज़ में लिखा होता है। यहाँ पहुँचते ही उन्हें एक बहुत ही बड़ी बिल्डिंग दिखाई देती है। दरअसल यह बहुत बड़ी कंपनी होती है, और तीनों कंपनी के गेट पर पहुँचते हैं और वहाँ के सिक्योरिटी गार्ड को चिट्ठी दिखाते हैं। सिक्योरिटी गार्ड चिट्ठी नियुक्ति विभाग के पास भेज देता है, और जैसे ही प्रबंधक को वह चिट्ठी मिलती है तो उसमें उसके मालिक का हस्ताक्षर होता है। वह उन तीनों से पूछता है। आप हमारे मालिक को कैसे जानते हैं। तभी बिक्रम जवाब देते हुए कहता है। मैं तुम्हारे बॉस का दोस्त हूं। अब प्रबंधक के पास इनको काम न देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। इस कंपनी के मालिक का हस्ताक्षर, जो उस चिट्ठी पर मौजूद था। कंपनी के मालिक सात दिनों की ट्रिप पर विदेशी कंपनियों के दौरे में थे, और उस बीच उनसे कोई संपर्क नहीं था, इसलिए प्रबंधक ने उन तीनों को काम पर रख लिया, और अपने साथ उन्हें काम की जगह दिखाने ले गया, लेकिन बिक्रम अचानक ही दूसरे रास्ते की तरफ़ मुड़ जाता है, और वह सीधे बॉस के चैम्बर के सामने पहुँचता है, और दरवाज़े के ताले को पासवर्ड से खोल देता है।
[story_id] => 13 ) POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 1 [story_title] => Part 3 | Hunted Story [story_content] =>कंपनी का प्रबंधक यह देखकरके आश्चर्यचकित रह जाता है। उसे यक़ीन ही नहीं होता कि जो पासवर्ड केवल कंपनी के मालिक को पता है। वह इसे कैसे पता चला। अब प्रबंधक उसे कोई ख़ास आदमी समझने लगता है। उसे पूरा यक़ीन हो जाता है, कि हो ना हो यह व्यक्ति बॉस ने हीं भेजा है, और वह उसे बिना रुके हुए अंदर जाने की इजाज़त दे देता है। जॉन और सुनील यह सब देखकर समझ नहीं पाते कि बिक्रम को यह सब कैसे पता। तभी अचानक बिक्रम सभी को बॉस के चेंबर से बाहर जाने को कहता है, और चेंबर का दरवाज़ा बंद कर देता है। कुछ ही घंटों के बाद प्रबंधक को बॉस का फ़ोन आता है, और बॉस प्रबंधक से पूछता है कि, मेरे कंप्यूटर को किसी ने इस्तेमाल किया था। तभी प्रबंधक सारी बात बता देता है। बॉस ग़ुस्से में मैनेजर को बोलता है। जल्दी से जाओ और उसे रोको नहीं तो, मैं बर्बाद हो जाऊँगा, और जैसे ही प्रबंधक चैम्बर का दरवाज़ा खोलता है, तो वह देखता है बिक्रम बेहोश पड़ा है। प्रबंधक अपने सुरक्षाकर्मियों से उसे उठाने को कहता है, और कुर्सी पर वापस बैठाता है। तभी बिक्रम को होश आता है प्रबंधक ग़ुस्से में बिक्रम को बोलता है, तुमने क्या किया ? मेरे बॉस बहुत नाराज़ है। लेकिन बिक्रम को कुछ याद नहीं कि, वह अपने बंगले के गेट से यहाँ तक कैसे आया है। दरअसल वह बंगला पहले उसी बॉस का होता है, और बॉस ने बंगले को, अपने ऑफ़िस की, एक लड़की के लिए ख़रीदा था, और कभी कभी साथ रहता था जो, कि उसके कंपनी में काम करती थी। बॉस पहले से ही शादीशुदा था, और यह बात अच्छे से जानता था कि, एक ना एक दिन वह लड़की उसके लिए ख़तरा बन सकती है, इसलिए वह उसकी निजी अश्लील विडियो रिकॉर्ड कर लेता है और जब एक दिन लड़की को यह बात पता चलती है तो, दोनो में खींचा तानी करते हुए लड़की के सर में चोट लग जाती है और वह दम तोड़ देती है।
[story_id] => 13 ) POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 1 [story_title] => Part 4 | Hunted Story [story_content] =>बॉस बंगले के गार्डन में ही लड़की को दफ़ना देता है, और लड़की की मौत के साथ ही उसका राज दफ़न हो जाता है। लेकिन जब उस बंगले में तीनों दोस्त हमें आते हैं तो, बिक्रम गॉर्डन में घूमते घूमते उस जगह पर अपना पैर रख देता है। जहाँ उस लड़की को दफनाया गया था। जिस वजह से उस लड़की का सीधा संपर्क बिक्रम से बन जाता है, वह बिक्रम के अंदर प्रवेश कर जाती है, और उसे क़ाबू में करके अपना बदला लेने के लिए ऑफ़िस प्रवेश करती है, और बॉस की काली करतूत को इंटरनेट में वायरल कर देती है। बॉस को विदेश से ही गिरफ़्तार कर लिया जाता है। उसका काला चिट्ठा सबके सामने खुल जाता है, और वह बेनक़ाब हो जाता है। उस लड़की ने मरने के बाद भी अपना बदला ले लिया था अब शायद उसकी आत्मा को शांति मिल जाएगी। तीनों दोस्त उस बंगले को बुरा सपना समझ कर भूल जाते हैं, और इस दर्दनाक भूतिया कहानी का अंत हो जाता है।
[story_id] => 13 ) POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 2 [story_title] => Vampire का इश्क़ [story_content] =>Horror Story Adhura Pyar : राकेश ने फोन पर बात करते करते अचानक एक तेज चीख सुनी। वह हेलो हेलो करता रहा लेकिन दूसरी ओर से चीखने की आवाज ही आ रही थी।
राकेश ने लगभग चीखते हुए कहा – ‘‘रमा क्या बात है तुम चीख क्यों रही हों? सब ठीक तो है?’’
लेकिन तभी दूसरी ओर से किसी ने फोन काट दिया। उसके बाद राकेश लगातार फोन मिलाता रहा लेकिन फोन स्विच ऑफ आ रहा था।
राकेश अपनी पत्नी रमा से बात कर रहा था। वह अपने घर से लगभग पन्द्रह किलोमीटर दूर था। रात में उसके पास कोई साधन नहीं था, कि वह घर पहुंच सके।
आखिर क्या हुआ होगा रमा के साथ जो वह इतनी जोर से चीखी थी। यही सोच कर परेशान हो रहा था। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह अपना बैग लेकर बाहर सड़क पर आ गया।
अधेरी रात में सुनसान सड़क पर उसे कोई नहीं दिख रहा था। वह कुछ देर खड़ा रहा। शायद कोई सवारी मिल जाये, लेकिन जब कुछ न दिखा। तो वह अपने घर की ओर पैदल चल दिया।
राकेश बहुत घबराया हुआ था। फिर एक जगह रुक कर उसने दुबारा फोन मिलाया, लेकिन अभी भी फोन स्विच ऑफ था।
सुनसान सड़क पर उसे चलते हुए डर भी लग रहा था। वहां स्ट्रीट लाईट बहुत दूर थी। बाकी सड़क पर अंधेरा था, तभी उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी। राकेश ने इधर उधर देखा लेकिन वहां कोई नहीं था।
वह आगे बढ़ गया और तेज कदमों से उस स्ट्रीट लाईट की ओर चल दिया। जैसे जैसे वह आगे बढ़ रहा था। किसी औरत के रोने की आवाज उसके कानों में पड़ रही थी। वह और तेज चलने लगा। उसने पलट कर देखा लेकिन वहां कोई नहीं था।
वह और तेज चलने लगा, लेकिन यह क्या वह जितना तेज चल रहा था। वह आवाज और तेजी से उसके कानों में आ रही थी। राकेश ने रुक कर उस आवाज को सुना तो उसके रोंगटे खड़े हो गये – ‘‘हे भगवान ये तो रमा की आवाज है वह यहां कहां है।’’
तभी रोने की आवाज बंद हो गई। राकेश को लगा यह उसका वहम है वह तेजी से आगे चलने लगा, तभी उसके कानों में रमा की आवाज आई -‘‘रुक जाओ राकेश जहां तुम जा रहे हो वहां अब कुछ नहीं है। मैं यहीं हूं तुम्हारे पास।’’
राकेश जोर से चीखा – ‘‘कहां हो तुम रमा सामने आओ, और तुम इतनी जल्दी यहां कैसे आ गईं। अभी तो तुम फोन पर बात कर रहीं थीं।’’
राकेश रुक कर चारों ओर देखने लगा तभी उसे फोन की याद आई उसने अपना फोन निकाला और उसक फ्लेश लाईट जला कर इधर उधर देखने लगा।
वह जोर से रमा रमा चिल्ला रहा था। लेकिन वहां कोई नहीं था। तभी फिर से रोने की आवाज आने लगी। राकेश को बहुत डर लग रहा था। वह तेजी से आगे चलने लगा।
कुछ दूर जाने पर उसने देखा सड़क के किनारे एक पेड़ के नीचे सफेद साड़ी पहने एक औरत खड़ी थी। उसका मुंह पर लंबे लंबे बाल ढके हुए थे। वह रो रही थी।
राकेश वहीं रुक गया। उसने जोर से कहा – ‘‘कौन है वहां?’’
वह औरत रो रही थी। राकेश ने उसकी आवाज पहचान ली – ‘‘अरे रमा तुम यहां कैसे?’’
[story_id] => 14 ) POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 2 [story_title] => डायन का अधूरा प्यार [story_content] =>Horror Story Adhura Pyar : राकेश ने फोन पर बात करते करते अचानक एक तेज चीख सुनी। वह हेलो हेलो करता रहा लेकिन दूसरी ओर से चीखने की आवाज ही आ रही थी।
राकेश ने लगभग चीखते हुए कहा – ‘‘रमा क्या बात है तुम चीख क्यों रही हों? सब ठीक तो है?’’
लेकिन तभी दूसरी ओर से किसी ने फोन काट दिया। उसके बाद राकेश लगातार फोन मिलाता रहा लेकिन फोन स्विच ऑफ आ रहा था।
राकेश अपनी पत्नी रमा से बात कर रहा था। वह अपने घर से लगभग पन्द्रह किलोमीटर दूर था। रात में उसके पास कोई साधन नहीं था, कि वह घर पहुंच सके।
आखिर क्या हुआ होगा रमा के साथ जो वह इतनी जोर से चीखी थी। यही सोच कर परेशान हो रहा था। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह अपना बैग लेकर बाहर सड़क पर आ गया।
अधेरी रात में सुनसान सड़क पर उसे कोई नहीं दिख रहा था। वह कुछ देर खड़ा रहा। शायद कोई सवारी मिल जाये, लेकिन जब कुछ न दिखा। तो वह अपने घर की ओर पैदल चल दिया।
राकेश बहुत घबराया हुआ था। फिर एक जगह रुक कर उसने दुबारा फोन मिलाया, लेकिन अभी भी फोन स्विच ऑफ था।
सुनसान सड़क पर उसे चलते हुए डर भी लग रहा था। वहां स्ट्रीट लाईट बहुत दूर थी। बाकी सड़क पर अंधेरा था, तभी उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी। राकेश ने इधर उधर देखा लेकिन वहां कोई नहीं था।
वह आगे बढ़ गया और तेज कदमों से उस स्ट्रीट लाईट की ओर चल दिया। जैसे जैसे वह आगे बढ़ रहा था। किसी औरत के रोने की आवाज उसके कानों में पड़ रही थी। वह और तेज चलने लगा। उसने पलट कर देखा लेकिन वहां कोई नहीं था।
वह और तेज चलने लगा, लेकिन यह क्या वह जितना तेज चल रहा था। वह आवाज और तेजी से उसके कानों में आ रही थी। राकेश ने रुक कर उस आवाज को सुना तो उसके रोंगटे खड़े हो गये – ‘‘हे भगवान ये तो रमा की आवाज है वह यहां कहां है।’’
तभी रोने की आवाज बंद हो गई। राकेश को लगा यह उसका वहम है वह तेजी से आगे चलने लगा, तभी उसके कानों में रमा की आवाज आई -‘‘रुक जाओ राकेश जहां तुम जा रहे हो वहां अब कुछ नहीं है। मैं यहीं हूं तुम्हारे पास।’’
राकेश जोर से चीखा – ‘‘कहां हो तुम रमा सामने आओ, और तुम इतनी जल्दी यहां कैसे आ गईं। अभी तो तुम फोन पर बात कर रहीं थीं।’’
राकेश रुक कर चारों ओर देखने लगा तभी उसे फोन की याद आई उसने अपना फोन निकाला और उसक फ्लेश लाईट जला कर इधर उधर देखने लगा।
वह जोर से रमा रमा चिल्ला रहा था। लेकिन वहां कोई नहीं था। तभी फिर से रोने की आवाज आने लगी। राकेश को बहुत डर लग रहा था। वह तेजी से आगे चलने लगा।
कुछ दूर जाने पर उसने देखा सड़क के किनारे एक पेड़ के नीचे सफेद साड़ी पहने एक औरत खड़ी थी। उसका मुंह पर लंबे लंबे बाल ढके हुए थे। वह रो रही थी।
राकेश वहीं रुक गया। उसने जोर से कहा – ‘‘कौन है वहां?’’
वह औरत रो रही थी। राकेश ने उसकी आवाज पहचान ली – ‘‘अरे रमा तुम यहां कैसे?’’
राकेश उसके पास जाने लगा लेकिन अचानक वह रुक गया। राकेश को अहसास हुआ कि यह रमा नहीं हो सकती। वह वहीं खड़ा हो गया, तभी वह औरत रोते हुए बोली – ‘‘राकेश मैं अब वहां नहीं हूं जहां तुम मुझे ढूंढ रहे हो। मेरे पास आओ।’’
राकेश अपने होश हवास खो बैठा था। वह उस औरत की ओर चल दिया। पास जाकर उसने देखा उसके हाथ बिल्कुल काले थे। राकेश ने उसके पैरों की तरफ देखने की कोशिश की लेकिन वह अंधेरे में उसके पैर नहीं देख पाया। तभी तेज हवा के झोंके से उसके चेहरे से बाल हट गये।
राकेश ने जैसे ही उसका चेहरा देखा उसकी चीख निकल गई। इस गहरे सन्नाटे में उसकी तेज चीख से पूरा वातावरण गूंज गया।
भयानक काला चहरा, लंबे दांत जिन पर खून लगा था। जैसे वह अभी किसी का खून पीकर आई हो राकेश उसे देखते ही बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। बंद होती आंखों से राकेश बस इतना ही देख पाया कि वह जोर जोर से हस रही थी।
राकेश की आंख खुली तो वह अस्पताल में बेड पर लेटा था। उसने उठने की कोशिश की लेकिन वह उठ नहीं पाया उसके बदन पर कई जगह पट्ट्यिां बंधी थी। राकेश ने देखा उसके हाथ पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है।
तभी डॉक्टर ने आकर कहा – ‘‘बहुत किस्मत वाले हो आप आपका एक्सीडेंट हुआ और आप बच गये। वैसे कैसे हुआ था आपका ऐक्सीडेंट।
राकेश ने आश्चर्य से डॉक्टर को देखा – ‘‘नहीं डॉक्टर मेरा तो कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ था। उस सड़क पर उस समय कोई नहीं था।’’
तभी एक पुलिस इंस्पेक्टर अंदर आया उसने कहा – ‘‘वहां से कुछ लोग कार से जा रहे थे वहीं तुम सड़क के किनारे खून से लथपथ पड़े थे। हमें लगा किसी ने अंधेरे में तुम्हें टक्कर मार दी।’’
राकेश ने बताया – ‘‘नहीं नहीं इंस्पेक्टर साहब ऐसा कुछ नहीं हुआ था। वो तो एक औरत सफेद साड़ी पहने मेरी पत्नी की आवाज में रो रही थी। मैं उसके पास गया तो मैंने देखा वह बहुत भयानक थी। मैं बेहोश हो गया फिर मुझे कुछ याद नहीं।’’
इंस्पेक्टर ने कहा – ‘‘ओहो तो आप भी उस डायन का शिकार हो गये। वह अक्सर लोगों को ऐसे ही अपना शिकार बनाती है और जान से मार देती है आपकी किस्मत अच्छी थी, कि आप बच गये।’’
राकेश ने कहा – ‘‘इंस्पेक्टर साहब मेरी पत्नी का पता लगाईये कल उसका फोन आया था। फिर फोन पर उसकी चीख सुनाई दी बाद में फोन कट गया।’’
यह सुनकर इंस्पेक्टर ने कहा – ‘‘आप उनका नम्बर बताईये, और अपने घर का पता भी बताईये मैं किसी को वहां भेज कर पता करवाता हूं।’’
राकेश से पता लेकर पुलिस राकेश के घर पहुंचती है। वहां उसकी पत्नी का शव रखा था। यह देखकर पुलिस वालों ने आस पास के लोगों से पूछा तो एक ने बताया – ‘‘कल हमने इसके चीखने की आवाज सुनी थी। जब हम पहुंचे तो इसके शरीर पर कई घाव थे जिनसे खून बह रहा था। हम इसे अस्पताल ले गये। वहां इसने दम तोड़ दिया। इसका फोन भी गिर कर टूट गया अब तो इसके पति राकेश का इंतजार कर रहे हैं।’’
एक पुलिस वाले ने कहा – ‘‘इनका कोई रिश्तेदार हो तो इनका अंतिम संस्कार कर दीजिये। इनके पति का भी एक्सीडेंट हो गया है वे नहीं आ पायेंगे।’’
वहां से आकर उन्होंने इंस्पेक्टर को सारी जानकारी दी। इंस्पेक्टर ने राकेश से बात की – ‘‘राकेश तुम्हारी पत्नी ठीक है लेकिन हमने उसे तुम्हारे बारे में कुछ नहीं बताया तुम ठीक हो जाओ तब अपने घर जाकर बता देना।’’
यह कहकर इंस्पेक्टर बाहर चला गया। उसने डॉक्टर से कहा – ‘‘इसकी पत्नी मर गई लेकिन ये बात इसे मत बताना। लेकिन अचानक यह सब कैसे हुआ कुछ पता नहीं लग पा रहा।’’
डॉक्टर ने कहा – ‘‘इंस्पेक्टर साहब ऐसे कई केस मेरे पास आते रहते हैं। यहीं पास में गॉव के सरपंच जोगिन्द्र सिंह है आप उनसे बात कीजिये वे ही कुछ बतायेंगे।
अगले दिन इंस्पेक्टर, सरपंच जोगिन्द्र सिंह के घर पहुंच जाते हैं। सारी बात सुनने के बाद जोगिन्द्र सिंह ने कहा – ‘‘ऐसा कई बार हो चुका है आप शायद यहां नये आये हैं। यह एक डायन है जो लोगों को अपना शिकार बनाती है। जब वह फोन पर बात कर रहा होगा तो उसने सुन लिया होगा। वह जिसे अपना शिकार बनाती है। पहले वह उसे प्यार करने वाले को मार देती है। फिर उसे अपना शिकार बनाती है।’’
इंस्पेक्टर ने कहा – ‘‘लेकिन वह आदमी तो जिंदा है बहुत चोट लगी है उसे।’’
जोगिन्द्र सिंह ने कहा – ‘‘किस्मत अच्छी थी जो वह बच गया। जब वह उसे मारने वाली होगी शायद तभी वहां वे लोग आ गये होंगे जो उसे अस्पताल ले गये।
कुछ दिन में राकेश चलने फिरने लायक हो गया। इंस्पेक्टर उसे अपनी गाड़ी में बिठा कर उसके घर ले गये। पत्नी की मौत का पता लगते ही राकेश फूट फूट कर रोने लगा – ‘‘इंस्पेक्टर साहब आपने मुझसे झूठ बोला। मेरी रमा तो पहले ही जा चुकी थी।’’
इंस्पेक्टर ने कहा – ‘‘वह औरत जिसने तुम पर हमला किया वह एक डायन थी। मैंने उसके बारे में पता किया। उसके जब वह जिन्दा थी तो उसके प्रेमी ने उसे छोड़ दिया था। जिसके कारण उसने खुदकुशी कर ली। बाद में उसने अपने प्रेमी को भी मार डाला, तब से जब वह कहीं भी दो प्यार करने वालों के बारे में सुनती है उन्हें मार देती है। तुमसे पहले भी कई केस हो चुके हैं।’’
राकेश को गहरा सदमा लगा था। वह अब सारे दिन घर बंद करके अंदर बैठा रहता था। रात में वह उस औरत को सपने में देखता था।
एक दिन इंस्पेक्टर को पता लगा कि राकेश मर गया। जब वह वहां पहुंचा तो आस पास वालों ने बताया, कि वह रात को उस औरत के दिखने का दावा करता था। वह उससे कहता था। मुझे भी मार दे।
आज हमने देखा तो उसका घर खुला पड़ा था और उसकी लाश जमीन पर पड़ी थी।
इंस्पेक्टर और जोगिन्द्र सिंह जी दोंनो बात कर रहे थे। इंस्पेक्टर बोला – ‘‘क्या कभी इस डायन के खौंफ से यहां के लोगों को आजादी मिल पयेगी।’’
जोगिन्द्र सिंह ने कहा – ‘‘पता नहीं हम तो बस लोगों को समझाते हैं कि रात होते ही अपने घर के खिड़की दरवाजे बंद कर लो और चुपचाप सो जाओ किसी से बात मत करो क्योंकि वह अपना शिकार किसी की बातें सुनकर ही करती है।’’
आज भी उस सड़क पर चारों और सन्नाटा रहता है। मौत का सन्नाटा।
[story_id] => 15 ) POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 2 [story_title] => सफर भाग 2 [story_content] =>Horror Podcast in Hindi : एक ऐसा तांत्रिक, जो उस नरपिशाच से भी ज्यादा शक्तिशाली हो, कहां मिलेगा। यही सोच रहा था अनुज?
अनुज इसी उधेड़ बुन में अपने घर आ गया। वहां उसके पिता रामपाल जी ने कहा – ‘‘अनुज मैं चाहता हूं, तू कल शहर वापस चला जा। मैंने सुना है कि तू अपने दोस्त की मौत का बदला, उस नरपिशाच से लेना चाहता है। इस सब चक्कर में मत पड़ और शहर चला जा।’’
‘‘पिताजी आप बात को समझिये, यह सब मैं अपने दोस्त के लिये नहीं कर रहा हूं। बल्कि इस गांव को, नरपिशाच के चंगुल से मुक्त कराने के लिये कर रहा हूं।’’ अनुज ने अपने पिता को समझाते हुए कहा।
रामपाल जी ने गुस्से से उसे डाटा – ‘‘मैं तुझे जो कुछ कह रहा हूं। बस वही कर, कल अगर तुझे कुछ हो गया, तो हम क्या करेंगे। आज तक उस तांत्रिक से कोई नहीं जीत पाया। न जीते जी, न उसके मरने के बाद।’’
अनुज बहुत डर गया था। वह अपने पिता के गुस्से को जानता था। अनुज बोला -‘‘पिताजी मैं शहर चला जाउंगा, लेकिन किसी को तो आगे बढ़ना पड़ेगा। आप गॉव वालों से कहिये मेरा साथ दें। अगर सब मिल कर इस समस्या से निकलने की कोशिश करेंगे। तो हम बच पायेंगे। नहीं तो एक न एक दिन, पूरा गांव उसका शिकार बन जायेगा।’’
रामपाल जी बोले – ‘‘ठीक है कोशिश कर लेते हैं। मैं गांव वालों से बात करूंगा, लेकिन तू कुछ भी अकेले मत करना।’’
अनुज मान गया। अगले दिन गांव में पंचायत रखी गई। उसमें फैसला हुआ कि गांव के चार आदमी दूसरे गांव जाकर तांत्रिक ढूंढेंगे। उनके साथ अनुज भी जायेगा।
अगले दिन अनुज अपने साथ गांव के चार लोगों को लेकर, सुबह ही निकल गया। वे सब दूसरे गांव गये। कई तांत्रिकों से मिले, लेकिन सभी ने मना कर दिया, क्योंकि वो सब उस तांत्रिक और उसकी शक्तियों के बारे में जानते थे।
इस सब में शाम होने लगी थी। तभी एक गांव वाले ने कहा – ‘‘हमें वापस गांव चलना चाहिये अगर अंधेरा हो गया, तो वह नरपिशाच हमें नहीं छोड़ेगा। उसे सब पता होगा कि हम क्या कर रहे हैं।’’
सबने उसकी बात का समर्थन किया और गांव की ओर चल दिये। गांव तक पहुंचने से पहले ही अंधेरा होने लगा। यह देख कर सभी डर गये। अनुज ने चारों को रोका और कहा – ‘‘भाईयों अंधेरे में जाना ठीक नहीं। मैं पहले ही अपना दोस्त खो चुका हूं। हम यहां किसी धर्मशाला में रुक जाते हैं।’’
चारों गांव वाले भी डरे हुए थे, वे मान गये। सभी वापस मुड़ गये, लेकिन तभी उन्हें किसी के रोने की आवाज सुनाई दी। अनुज पीछे मुड़ जाना चाहता था। तभी एक गांव वाले ने उससे कहा – ‘‘ऐसी गलती मत करना यह उसी नरपिशाच की चाल है। पीछे मुड़ कर देखा तो वो तुम्हें अपनी ओर बुला लेगा।’’
अनुज सावधान हो गया और वापस चलने लगा तभी उसके कानों में आवाज पड़ी – ‘‘रुक जा दोस्त इतने साल की दोस्ती। अब दोस्त को अकेला छोड़ कर जा रहा है। यह नरपिशाच मुझे रोज मारता है। मुझे बचा ले।’’
अनुज पीछे मुड़ा और देखा एक खेत की पगडंडी पर उसका दोस्त राहुल खड़ा रो रहा था। उसके कपड़े फटे हुए थे। उसके कपड़ों पर कई जगह खून लगा था। उसके हाथों से भी खून बह रहा था।
अनुज रोता हुआ अपने दोस्त की तरफ तेजी से भागा, लेकिन गांव के चारा लोगों ने उसे तेजी से पकड़ लिया।
अनुज चिल्लाने लगा – ‘‘छोड़ो मुझे। मेरा दोस्त बुला रहा है। मुझे उसे छुड़ाना है।’’
तभी एक गांव वाले उसे थप्पड़ मारा – ‘‘बेवकूफ तू तो मरेगा ही हमें भी मरवायेगा। वो तेरा दोस्त नहीं है। नरपिशाच ने उसे अपना चेला बना लिया है। वह अब तेरा दोस्त नहीं है। नरपिशाच मार डालेगा हम सब को।’’
अनुज की हालत खराब हो गई थी। वही वहीं जमीन पर बैठ गया। एक ने उसे पानी पिलाया। उसकी आंखों से अब भी आंसू बह रहे थे। दो आदमियों ने उसे उठाया और अपने साथ लेकर आगे बढ़ गये। पांचो अब एक धर्मशाम में रुक गये थे और सुबह होने का इंतजार कर रहे थे।
सबने फैसला किया, कि उनमें से बारी बारी एक जागता रहेगा। कहीं अनुज उठ कर उधर न चला जाये। अनुज की रखवाली करना जरूरी था।
अनुज गहरी नींद में सो रहा था। तभी उसने सपने में देखा कि वह नरपिशाच राहुल को मार रहा है। अपने नखून उसके शरीर में गड़ा कर उसका खून पी रहा है। राहुल अनुज अनुज पुकार रहा था।
अचानक अनुज की आंख खुली, वह दरवाजे की ओर भागा। एक आदमी ने सबको शोर मचा कर जगा दिया फिर चारों ने अनुज को पकड़ लिया।
तभी उपर सीढ़ियों से गेरुए कपड़े पहने, एक साधू बाबा नीचे आये। उन्होंने अनुज के उपर गंगाजल के छींटे मारे। अनुज शांत हो गया। वह अब बेहोश सा होने लगा था। दो आदमी उसे पकड़ कर कमरे के अंदर ले गये।
साधू बाबा के पूछने पर, बाकी दोंनो आदमियों ने सारी बात बता दी। उन्होंने कहा – ‘‘इसे कल साथ में लेकर मेरे आश्रम में आना।’’
सुबह जब अनुज की आंख खुली, तो चारो आदमी उसे लेकर साधू बाबा के आश्रम में पहुंच गये। अनुज से बाबा ने अकेले में बात की, और उसे गांव जाने के लिये कहा।
बाबा से मिलकर अनुज और चारो आदमी गांव पहुंच गये। वहां जाकर अनुज ने मुखिया से कहा – ‘‘मुखिया जी साधू बाबा गांव में आयेंगे और यहां हवन पूजन करके, उस तांत्रिक को मुक्ति दिलायेंगे। साथ उन्होंने कहा आज तक जितने भी लोग उसका शिकार हुए हैं। वे उन्हें भी मुक्ति दिलायेंगे।’’
मुखिया जी बहुत खुश हुए वे बोले – ‘‘अगर ऐसा हो जाये तो हमारे गांव का कल्याण हो जायेगा। बेटा तुमने बहुत अच्छा काम किया है। अपनी जान पर खेल कर, इस गांव को बचाने की कोशिश की है।’’
दो दिन बाद साधू बाबा गांव पहुंचे। उनके साथ उनके कुछ शिष्य भी थे। उन्होंने गांव में हवन करना शुरू किया। उन्होंने उस दरवाजे को खोलने के लिये कहा। दरवाजा खोल दिया गया। तभी दरवाजे से बहुत भयानक आवाजें आने लगीं। रात का समय था। बहुत तेजी से एक साया उस दरवाजे पर आया। उसके मुहं से भयानक आवाजें निकल रहीं थीं।
साधू बाबा ने उसे मंत्रों से बांध कर, हवन कुण्ड के पास बुलाया।
साधू बाबा की शक्ति के सामने, उस नरपिशाच की शक्ति कम पड़ गई थी। बुराई पर अच्छाई की जीत हो रही थी। कुछ ही देर में उसकी आत्मा को मुक्ति मिल गई।
गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। साधू बाबा ने खेतों में जाकर गंगा जल छिड़का, साथ ही गांव वाले भी अपने अपने खेत में पहुंचे। इसके बाद साधू बाबा ने गांव की सीमा पर जाकर, एक बड़ी सी कील, मंत्र सिद्ध करके मुखिया जी को दी और कहा – ‘‘इसे यहां गाड़ दो। आज के बाद कोई भी बुरी शक्ति, गांव में प्रवेश नहीं कर सकेगी।’’
[story_id] => 15 ) POST: Array ( ) JSON: Array ( [user_id] => 2 [story_title] => आत्मा की पुकार [story_content] =>Short Horror Story in Hindi : अमावस्या की वो रात जब बिल्कुल अंधेरा था। हाथ को हाथ नहीं दिखाई पड़ता था। ऐसी अंधेरी रात में निशांत अपनी कार से घर की ओर जा रहा था। वह जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहता था।
तभी उसे रास्ते में एक आदमी काले कपड़े पहने चलता दिखाई दिया। निशांत आगे बढ़ रहा था तभी उसने हाथ दिया। निशांत गाड़ी रोकना नहीं चाह रहा था, लेकिन अचानक वह आगे आ गया।
जोर से ब्रेक लगा कर निशांत ने गाड़ी रोकी – उसे बहुत गुस्सा आया।
निशांत: क्या है मरना है क्या?
वह आदमी साईड वाली विंडो के पास आकर बोला –
आदमी: मरना नहीं बचाना है, तुझे, तेरे परिवार को, तेरे कारोबार को।
निशांत को कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
आदमी: परेशान है फिर भी इतना गुस्सा। कारोबार तेरा चल नहीं रहा। परिवार बीमारी से परेशान है और तुझे नहीं पता तेरे उपर मौत का साया छाया हुआ है।
निशांत: तुम्हें यह सब कैसे पता।
Read More : मेरा क्या कसूर?
आदमी: इस अमावस्या की रात मैं तेरा ही इंतजार कर रहा था। मुझे पता था। तू हाईवे छोड़ कर इस सुनसान रास्ते से गुजरेगा। मुझे अपने साथ ले चल आगे मौत का साया तेरा रास्ता रोके खड़ा है।
निशांत डर गया उसने उस आदमी को अपनी गाड़ी में बिठा लिया। निशांत ने गौर से देखा काले कपड़े पहले वह कोई तांत्रिक था। गले में कई छोटी बड़ी माला पड़ी हुईं थी हाथ की हर उंगली में अंगूठी, उसका रंग भी सांवला था। आंखों में काजल लगाये हुए था।
निशांत ने सोचा कहीं इसे गाड़ी में बिठा कर कोई गलती तो नहीं कर दी, लेकिन इसकी बातों को सुनकर वो इसे बैठाने से रोक नहीं पाया।
निशांत चुपचाप गाड़ी चला रहा था। तभी उस तांत्रिक ने कहा –
तांत्रिक: रुक जा यहीं पर वो सामने देख जिन्न खड़ा है अगर तू आगे जायेगा तो तेरी गाड़ी का एक्सीडेंट हो जायेगा।
निशांत: लेकिन बाबा मुझे तो कोई दिखाई नहीं दे रहा है।
तांत्रिक: चुप रह वो तुझे बुला रहा है। तेरी मौत बन कर। चुपचाप गाड़ी की लाईट बंद कर दे।
निशांत ने ऐसा ही किया। गाड़ी की लाईट बंद करते ही सारे में गुप अंधेरा छा गया।
तभी निशांत ने तेज आवाज सुनी जैसे धड़ाम से कुछ गिरा है –
तांत्रिक: लाईट जला लगता है वो जा रहा है।
निशांत ने लाईट जला कर देखा तो रास्ते में एक बड़ा सा पेड़ गिरा पड़ा था।
निशांत: बाबा अभी तो वहां कुछ नहीं था।
तांत्रिक: चुप रह वह जिन्न गुस्सा होकर जा रहा है उसे पता लग गया कि मैंने तेरी रक्षा की है।
निशांत: लेकिन बाबा मुझे तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।
तांत्रिक: वह चला गया। लेकिन गुस्से में यह पेड़ बीच में गिरा गया। यहां से गाड़ी मोड़ ले वैसे भी आगे जा नहीं सकते।
निशांत: बाबा आपने मेरी जान बचा ली। बहुत बहुत धन्यवाद।
तांत्रिक: वो सब बाद में भाग यहां से ये जिन्न बहुत शक्तिशाली होते हैं।
निशांत गाड़ी मोड़ कर दौड़ा रहा था। फिर वह हाईवे पर पहुंच गया। शहर आने वाला था तभी तांत्रिक ने कहा –
तांत्रिक: गाड़ी रोक दे मुझे यहीं उतरना है।
निशांत: लेकिन बाबा इस सुनसान रास्ते पर आप कहां जायेंगे?
तांत्रिक: मुझसे सवाल मत कर चुपचाप घर चला जा कल रात को मैं तेरे घर आउंगा।
निशांत डर के मारे कुछ नहीं बोला और गाड़ी लेकर घर की ओर चल दिया।
घर पहुंच कर उसने अपनी पत्नि रेखा को सारी बात बताई।
रेखा: सुनिये मां-पिताजी को यह सब मत बताना। पिताजी पहले से बीमार हैं मांजी यह सब सुनेंगी तो डर जायेंगी।
निशांत: अरे उस तांत्रिक ने मेरा पता तो पूछा ही नहीं वह यहां तक कैसे पहुंचेगा।
रेखा: वह सब छोड़िये आप सही सलामत आ गये यही काफी है।
अगले दिन रात को नौ बजे किसी ने दरवाजा खटखटाया। निशांत ने गेट खोला। सामने वही तांत्रिक खड़ा था।
निशांत: बाबा आप आपको मेरा घर कैसे मिला
तांत्रिक: मुझे पूजा करनी है। तेरे घर में किसी का साया है।
तांत्रिक ने पूजा शुरू कर दी। तभी उसकी निशांत की मां तांत्रिक के सामने आकर बैठ गईं।
मां: तुझे भी खा जाउंगी।
तांत्रिक: किसने भेजा है तुझे यहां?
मांः इस परिवार को बर्बाद करना है।
तांत्रिक: सही सही बता क्या बात है?
मां: यह मुझे शमशान से साथ लाया।
तांत्रिक: कब ?
मां: इसका दोस्त मरा था। तब यह शमशान गया था। वहां इसके दोस्त के बराबर में मेरी चिता जल रही थी। यह जूते पहन कर उस पर चढ़ गया।
तभी मैं इससे बदला लेने इसके साथ आ गई।
तांत्रिक: निशांत ये सही बोल रही है?
निशांत: हां पता नहीं बाबा एक चिता जल तो रही थी पास में पर मुझे नहीं पता मैंने कब उस पर पैर रख दिया।
तांत्रिक: शमशाम में जूते पहन कर क्यों गया तू?
निशांत: बाबा गलती हो गई।
तांत्रिक: लड़का गलती मान रहा है, जा चली जा यहां से।
मां: नहीं इसके बाप को लेकर जाउंगी।
तांत्रिक: मेरे साथ चल मैं तुझे मुक्ति दिलाउंगा।
मां: मुझे मुक्ति नहीं मिल सकती। मेरी बेटी भूखी है।
तांत्रिक: कहां है तेरी बेटी?
मां: जमना के पीछे झुग्गी में है। उसे भूखा छोड़ कर मैं भीख मांगने निकली थी। तभी एक ट्रक चढ़ गया। मेरी बेटी मेरा इंतजार कर रही है।
तांत्रिक: तेरी बेटी का इंतजाम हो जायेगा। चल मेरे साथ।
तभी निशांत की मां बेहोश हो गई।
तांत्रिक: तुम्हें इसकी बेटी को पालना होगा तभी इसकी आत्मा को शांति मिलेगी। जल्दी बोलो।
रेखा: ठीक है बाबा हम पालेंगे। लेकिन पिताजी को ठीक कर दीजिये।
निशांत ने भी उसकी हां में हां मिलाई।
तांत्रिक और निशांत उस झुग्गी में गये। वहां झुग्गी वालों से बात की और निशांत ने उस बच्ची को गोद ले लिया।
उसके बाद न तो वह तांत्रिक नजर आया न वह चुड़ेल।
निशांत का परिवार बहुत खुशहाल हो गया। उसके पिता स्वस्थ हो गये। कारोबार फिर से चलने लगा।
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